शुक्र कर रब का

शुक्र कर रब कातू अपने घर में है,पूछ उस से जोअटका सफ़र में है! यहाँ पिता की शक्ल नहीं देखीआखरी वक़्त में कुछ लोगों ने,बेटा हॉस्पिटल में औरपिता कब्र में है तेरे घर में राशन है साल भर का,तू उसका सोच जो दो वक़्त कीरोटी के फ़िक्र में है ! तुम्हें किस बात की जल्दी … Continue reading शुक्र कर रब का

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त्रिदोष ज्वर

तीन ताप:-【काम, क्रोध, लोभ】हम सभी को त्रिदोष ज्वर हो गया हैं।जिसकी वजह से जीव चहुओर पागलों की भाँति मारा मारा दर दर भटकता फिरता हैं। इसीलिए कहा है, कभी योग में फंसतातो कभीभोग में फंस जाता,वियोग में कभीआंसू बहतेतो कभीमोह में फंस जाता।----------कभी दयामय होदीन बन जाताबुद्धिहीन हो कभीकंगाल हो जाता,कभी गुणहीन मुर्ख बनसफल हो … Continue reading त्रिदोष ज्वर

हिंदी का थोडा़ आनंद लीजिये ….मुस्कुरायें …

हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे है,खाने पीने की चीजों से भरे है…कहीं पर फल है तो कहीं आटा-दालें है,कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले है ,चलो, फलों से ही शुरू कर लेते है,एक एक कर सबके मजे लेते है… आम के आम और गुठलियों के भी दाम मिलते हैं,कभी अंगूर खट्टे हैं,कभी खरबूजे, … Continue reading हिंदी का थोडा़ आनंद लीजिये ….मुस्कुरायें …

ह्रदय स्पर्श

जब तक चलेगी जिंदगी की सांसेकहीं प्यार कहीं टकराव मिलेगा !!कहीं बनेंगे संबंध अंतर्मन से तोकहीं आत्मीयता का अभाव मिलेगा कहीं मिलेगी जिंदगी में प्रशंसा तोकहीं नाराजगियों का बहाव मिलेगाकहीं मिलेगी सच्चे मन से दुआ तोकहीं भावनाओं में दुर्भाव मिलेगा !! कहीं बनेंगे पराए रिश्तें भी अपने तोकहीं अपनों से ही खिंचाव मिलेगा !!कहीं होगी … Continue reading ह्रदय स्पर्श

देखी तोरी सूरत जबहुं

देखी तोरी सूरत जबहुं आनंदित मन होई तबहुं, मुख मंडल मुस्कान जब देखाहुं चित्त परिचित होई है तबहुं। मन चंचल चित्त मधुबन वन भटकयो बंसी सुन तिहारी मृग नाचत जब दिख्यो, राधा संग तुम तब रास रचाए सबहुं ओर नंदन वन में मैं भटकयो। श्याम तुम चित्त कर हो ठहरे सुध बुध खोए मैं मोह … Continue reading देखी तोरी सूरत जबहुं

उसकी जरा सी दरख्वास्त पर

उसके रहम को क्या नाम दें हम तो यूंही इंतेहनों से गुजर आए हैं, जरा नवाजी निभा दी थी उन्होंने मोहब्बत का उसे नाम दे आए हैं। इश्क़ ये नहीं आसान इतना तो समझ लिया हम क्या करें हम तो उसे दिल ही दे आए है, बड़े बडों के मशवरे ठुकरा दिए हमने अब उसकी … Continue reading उसकी जरा सी दरख्वास्त पर

चलना छोड़ दूँ मंजूर मगर नहीं!

माना कि आसान ये सफर नहीं,चलना छोड़ दूँ मंजूर मगर नहीं!जीत होगी तो सभी साथ चलेंगे,हार में यहाँ कोई हमसफर नहीं!! धन के लिए जमीर का सौदा,न हासिल हो कभी ये ओहदा,झांकु मैं किसी की तिज़ोरी में,ऐसे फिसलती मेरी नज़र नहीं!! कमजोर पर ही रौब झाड़ना,दूसरों के निवालों को ताड़ना,गरीब की आह पर न पसीजे,इतना … Continue reading चलना छोड़ दूँ मंजूर मगर नहीं!

एक पुरानी  तस्वीर फिर याद आयी

वोह कस्ती बनाना कागज़ के प्लेन उड़ाना एक छोटी सी आदत बचपन की एक पुरानी तस्वीर फिर याद आयी। ________________________________ पेंसिल उठा कर सीनरी बनाना, उसमे एक पेड़ और एक झील याद आई, दिल रखने को घरवालों से थोड़ी तारीफ भर पाई। _________________________________ सबको बताना कितने शैतान थे हम, और बचपन की याद फिर भर … Continue reading एक पुरानी  तस्वीर फिर याद आयी