अब जल्द ही कल्कि आने वाले हैं

हारिमय शिव आभा कुछ ऐसी काली के संग विराजे हैं , पीला चाँद अँग वस्त्र भी पीला सभी रुद्राक्ष पीले धारे हैं , कमंडल वासुकि और छाल सभी भए पीले हरी से हुए सारे हैं , शिव दे रहे चेतना जागो अब मेरे बच्चों एक जुट सब सनातनी अब सारे हैं । एक हो जाओ … Continue reading अब जल्द ही कल्कि आने वाले हैं

बस शून्य सा सब कुछ हो रहा

कुछ काला कुछ उज्ला कुछ पीछे कुछ आगे समय परिवर्तन हो रहा । स्थिर्ता बुद्धि और विवेक ना तुलना है ना परिकल्पना बस शून्य सा सब कुछ हो रहा । ना पराजय का भय ना विजय का उद्घोष बस शून्य सा सब कुछ हो रहा । चित्त स्थिर शंका शून्य और काली की मुस्कुराहट बस … Continue reading बस शून्य सा सब कुछ हो रहा

पिता

हर मोड़ पर इस सफ़र में पिता याद आता है , जब ख़ुशियाँ हो संग तो पिता याद आता है , दुविधा में हो ज़िंदगी तो पिता याद आता है, लगे कि कोई अपनी रोटी कम करके हमें सुविधा दे , वो पिता याद आता है, उपकारों को जिसके चुका नहीं सकते वो पिता याद … Continue reading पिता

ऐसे दोस्त का एहसान जानिए

जो ख़ुशी मेंशामिल ना करे ,ऐसे दोस्त काएहसान जानिए। आइना दिखाने वालेबहुत आते हैं ,ऐसे दोस्त कोसबसे बेहतरीन जानिए। हम आँसू को अपने पी जाएँइतना दम रखते हैं ,आप मिलिए तो हमसेसबसे ख़ुशक़िस्मत ना लगें तो जानिए, कुछ कमजोरीहर इंसान में होती है,यूँही बस आँसू पी जाएँऐसे दोस्त कोसबसे बड़ा नासूर जानिए। शुक्रिया तेरा ऐ … Continue reading ऐसे दोस्त का एहसान जानिए

हिन्दी वर्णमाला का क्रम

यह कविता जिसने भी लिखी प्रशंसनीय है।हिन्दी वर्णमाला का क्रम से कवितामय प्रयोग-बेहतरीन है।वंदन करते हैं उस कवि का अ चानकआ कर मुझसेइ ठलाता हुआ पंछी बोलाई श्वर ने मानव को तोउ त्तम ज्ञान-दान से तौलाऊ पर हो तुम सब जीवों मेंऋ ष्य तुल्य अनमोलए क अकेली जात अनोखीऐ सी क्या मजबूरी तुमकोओ ट रहे … Continue reading हिन्दी वर्णमाला का क्रम

कुछ शेष नहीं

ज़िंदगी में सागर की सी शांत लहरों में तूफ़ान आना ज़रूरी होता है , कुछ ना कहें हम तो सबके जज़्बातों में उफान आना ज़रूरी होता है । ——- कुछ ख़्यालों को दफ़नाते चले आए हैं ज़िंदगी भर, अब तो आदतें भी याद नहीं अपनी खुद को यूँही मिटा लेना इस दुनिया का दस्तूर मालूम … Continue reading कुछ शेष नहीं

तिलक को मानिए

महिमा भारी तिलक की,को कर सके बखान | आप तिलक को मानिये ,श्री विष्णू भगवान || जिसके माथे पर तिलक ,की होती है छाप | भूत प्रेत ही दूर से ,भग जाते चुपचाप || माथे की शोभा तिलक ,तिलक हमारी शान | बिना तिलक माथा लगे ,बिल्कुल ही सुनसान || तिलक करे परिवार को , … Continue reading तिलक को मानिए

राधा कृष्ण

प्रेम का सागर लिखूं!या चेतना का चिंतन लिखूं!प्रीति की गागर लिखूं,या आत्मा का मंथन लिखूं!रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित,चाहे जितना लिखूं…. जेल में जन्मा लिखूं ,या गोकुल का पलना लिखूं।देवकी की गोदी लिखूं ,या यशोदा का ललना लिखूं ।।रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे जितना लिखूं…. देवकी का नंदन लिखूं,या यशोदा का लाल लिखूं।वासुदेव का … Continue reading राधा कृष्ण

बिलइया लै गई

“ऊंट बिलैया ले गई सो हांजू- हांजू कइये बुंदेली के महान कवि श्री जगन्नाथ सुमन, तहसील मउरानीपुर के पास स्थित पचवारा गांव के निवासी थे। उनकी यह रचना आज के परिवेश पर बुंदेली मे कलात्मक व्यंग्य है।कविता की पहली लाइन का अर्थ है –बड़ा आदमी या आपका अफसर कुछ भी कहे, आप बस उसकी चमचागिरी … Continue reading बिलइया लै गई