पंछियों से पूछो

पौलयूशन से भराआसमान देख कर,समझ जाता हूँ पंछी क्यों दिखते नहीं यहाँ।पूछा जब मैने क्यों उड़ते हो वहाँ, समझ जाओ तुमकहते मुझे ,हवा ताज़ा है वहाँ कैसे जिए हम यहाँ इंसान नहीं रहता वहाँ।इंसान बनाया खुदा ने वजह देकर ,दो पैसे कमाने को फिर रहा हमेशाजहाँ-तहाँ,भूल कर सभी सभी रिश्ते नातेढूँढता फिर रहा यहाँ वहाँ,पेड़ काट सभी बनाए आशियाने यहाँ ।ए दोस्त तू तो सुनक्या कह रहा सन्यासी,अपनी बुद्धि का उपयोग कर,मत … Continue reading पंछियों से पूछो