कब सत्य प्रत्यक्ष देखूँगा मैं

कहता गुरु बहुत कर्मशील होना है तुम्हें, कहता गुरु बहुत धेर्य धरना है तुम्हें, तब चलोगे तुम तब बढ़ोगे तुम , तब हो अग्रसर नेतृत्व सबका करोगे तुम, यही सुन कर जीता हूँ मैं। मैं बैठा यही सोचता हूँ , क्यों और कहाँ जाना है मुझे, गुरु के कचोटने से क्यों बेचैन रहता हूँ मैं। इच्छा तो उस ज्ञान की है , इच्छा … Continue reading कब सत्य प्रत्यक्ष देखूँगा मैं