राजनीति का रंग और ढंग बदल गए

राजनीति का रंग और ढंग बदल गए, बदल चुके इंसान, दफ़न हो चुकी राजनीति  बचा ना कोई निशान। कुछ हैं इतिहास में जिन्होंने  लिखी नीतियाँ , किया करते थे राज  नाम ले कर जिनका  बनती थीं नीतियाँ। अब तो राजनीति  बन गयी है रंग मंच उन लोगों का जो बटोरें दोनो हाथ, खेलें खेल  बैठ क़ब्र पर, … Continue reading राजनीति का रंग और ढंग बदल गए

वक़्त से रुसवा हो ऐसे चले थे कि बेपरवाह हो गए

वक़्त से रुसवा हो ऐसे चले थे कि बेपरवाह हो गए , उसने जाने अनजाने याद रखा और ख़ैरखवाह हो गए। बेरुख़ी समझी हमने परवरदेगार की सन्यासी हो गए, खरखवाहों में रह कर भी बेमुराव्वत लापरवाह हो गए। कुछ जुनून तो है नौजवान-ए-हिंद में कर गुज़रने को, ज़लज़ले से निकली लहरों में खड़े बंदरगाह हो गए … Continue reading वक़्त से रुसवा हो ऐसे चले थे कि बेपरवाह हो गए