उनकी इसी अदा पे ये ज़िंदगी बितायी जाए

ना भागा जाए ना छोड़ा जाए,ये ज़िंदगी की कश्मकश है दोस्तों,यूँही बितायी जाए बस यूँही बितायी जाए ।कुछ पल मिल जाते हैं मुस्कुराने को,ये तनहाइयाँ यूँहीभुलाई जाएँ,इनहि मुस्कुराहटों के सहारे ये ज़िंदगी बस बितायी जाए ।जब देते हैं जजबात उनको मुस्कुराहटों में संजोये हुए तब उनकी नज़र में बस हम काफ़िर से खड़े नज़र आए,उठती है नज़र फ़नाह कर देने को उनकी इसी अदा पे ये तमाम … Continue reading उनकी इसी अदा पे ये ज़िंदगी बितायी जाए

महफ़िल-ए-जाँबाज़ को देख मुस्कुरा कर चल दिए

Dedicated  to all soldiers महफ़िल-ए-जाँबाज़ को देख मुस्कुरा कर चल दिए, वो बैठे थे नूर-ए-जंग की कामयाबी की मिसाल दिए। उस जाँबाज़ के अपनो के आँसुओं को देख रो पड़े छाती उनकी चौड़ी थी आँखों में आँसुओं को लिए । एक नादान भी था माँ की अगोश में छिपा हुआ नज़रें तलाशतीं जाँबाज़ को उसकी, … Continue reading महफ़िल-ए-जाँबाज़ को देख मुस्कुरा कर चल दिए

यायावर यात्री हैं हम तो, अहर्निश चहुं ओर घूमते

यायावर यात्री हैं हम तो, अहर्निश चहुं ओर घूमते| रस्ते टेढ़े- मेढ़े पर चल,मग में हम भी कभी न रुकते| लाभ-हानि के जन्म-मरण के, चक्रो से कैसे छुटकारा| वादेकर रखे हैं हमने, हम ने पाले खुद हैं रगड़े| शांत्त निशा है देर सबेरा ,कब होंगे प्रकाश के नवपल| षडयंत्रों के बीच बैठकर खोजरहे अध्यात्म आत्मबल| … Continue reading यायावर यात्री हैं हम तो, अहर्निश चहुं ओर घूमते

जब उस बार बुलाया था तुमने

पिछली बार भेजा था शेर बुलाने सपने मेंमैं भागा चला आया था,चढ़ा था पहाड़ तुम्हारा तब पहुँचा जहाँ आसन तुम्हारा था ,वहीं अद्भुत रूप तुम्हारा पिंडी रूप में विराजी हो वहीं शेरों पर सवारी हो ।तर गया था जीवन मेरा,सभी दुखों को छोड़ आया हूँ,सुखों से भरी झोली मेरी पढ़ लिख कर घर आया हूँ ।फिर घूमा है जीवन चक्र,दूर तलक चला आया हूँ बहुत कुछ पाया मैने,ये आशीर्वाद … Continue reading जब उस बार बुलाया था तुमने

नमन कर मैं चलूँ आगे लेने ब्रह्मज्ञान

एक आँधी सीआयी रहती जीवन में,इनसे बचने को तत्पर है रहता इंसान,बाल्यकाल में कहते पितापढ़ लिख ले अन्यथा उड़ जाएगा सूखे पत्ते समान,नासमझी में चले थे लड़ने हो पढ़े-लिखे जज़मान,सोचता यही चिंताग्रस्त हो जाएगी नैया पार,फिर जाऊँगा खोजने मैं उसे जो है सबका तारनहार।लो हो गया प्रतिबंधित इस जीवन मेंलड़ने आँधियों से,औरकरने सत्यापन,में उठूँगा और करूँगा जीवन का अभिनंदन,चल पड़ूँगा और लड़ूँगाबन चाणक्य का अभिमान आँधियों से अशोक समान।ज्ञात हुआ सत्य … Continue reading नमन कर मैं चलूँ आगे लेने ब्रह्मज्ञान

ग़म-ए-उल्फ़त से बेज़ार आगे चल दिए

उल्फ़तों में दोस्त यूँही बदनाम हुए हैं,अह्द-ए-उल्फ़त तो चंद लमहों में सिमटा है,रह-ए-उल्फ़त पे चलने की गुज़ारिश की थीलगा कर लगाम हमारे लबों पर मुस्कुरा कर चल दिए।खोल दिए हमने जब दर-ए-उल्फ़तयारों को यारी याद आयीदेखा और चल दिए,बहार-ए-उल्फ़त में डूबे थे हमयारों को आवाज़ लगाई और पीछे चल दिए।सर-ए-उल्फ़त इस क़दर बरपाई थी भागते हुए पीछे पीछे यारों से आगे निकल गए,अब ये आलम है आवाज़ … Continue reading ग़म-ए-उल्फ़त से बेज़ार आगे चल दिए

दोस्ती की ज़ुबान नहीं होती

बेगुनाहों की तक़दीर में ठोकरें ज़रूर हैं,पर बेगुनाहों की तस्वीर मैले नहीं होती,वक़्त पलटते देर नहीं लगती पलट जाते हैं लोगजब तक़दीर नहीं होती।तुम भी किस कस्मक़स में फँस गए दोस्त,यहाँ फैली हुए गंदगी कभी गंदी नहीं होती,हट जाएगा अँधेरा होगा सवेरा भी,क्योंकि कुछ नहीं रुकता यहाँजब तस्वीर नहीं होती।रुक जाओ सोच लो थोड़ा,आएगा वक़्त होंगे सब हमसफ़रलगाने गले इंतज़ार में,तब मुस्कुरा देना ज़रा सा हमारी तरफ़ देख कर,समझ … Continue reading दोस्ती की ज़ुबान नहीं होती

वक़्त करवट बदलता है आवाज़ नहीं होती

वक़्त करवट बदलता है आवाज़ नहीं होती, वो आग़ाज़ करता है तो आवाज़ नहीं होती । हम झेलते हुए मार वक़्त की ताक़त को देखते हैं वक़्त जब ना हो साथ ज़ोर-ए-परवाज़ नहीं होती। हमने रखा था हम-परवाज़ वक़्त को हार कर वक़्त के साथ इज़ं-ए-परवाज़ की आवाज़ नहीं होती । तय्यार रहना हमारी आदत … Continue reading वक़्त करवट बदलता है आवाज़ नहीं होती

माँ तुम्हारा प्यार ग़ज़ब है

माँ तुम्हारा प्यार ग़ज़ब है कभी प्यार कभी दुलार कभी ग़ुस्सा  कभी धिक्कार  ग़ज़ब है, कह देती हो कुछ ऐसा  गले में निवाला अटक गया, दूजे ही पल देती हो  दुलार और प्यार भरपूर, माँ तुम्हारा प्यार ग़ज़ब है । शिकायतें करती होतीं भरपूर  और शब्दों से देती हो ह्रदय भेद  उस पल ऐसा होता है … Continue reading माँ तुम्हारा प्यार ग़ज़ब है