हरे हरे साँई हरे हरे

श्री हरे मुरारी कृष्ण हरे श्री राम सदाचारी हरे हरे राधे बलिहारी कृष्ण हरे सिया जी के प्रियवर हरे हरे।  तुम पर बलिहारी कृष्ण हरे देखो राम की सवारी हरे हरे राधा संग बैठीं कृष्ण  हरे सिया संग बैठीं हरे हरे।  आँऊ दर तेरे कृष्ण  हरे चलें हम वैकुण्ठ हरे हरे चलो मेरे संग गाओ … Continue reading हरे हरे साँई हरे हरे

भवसागर तर जाना

जननी मेरी तुम सर्व प्रथम पूज्यनीय हो मेरे लिए नित्य चरण वन्दन करना तेरा नियम हो मेरे लिए। जीवन यहां यापन हो रहा, कर्म कारण बोध सब है मुझको तुम्हारे समाचार मिलना अन्तर मन की आवाज हो मेरे लिए। अकेले ना समझना वहाँ खुद को, दुख तुम्हारे हैं ज्ञात तेरे पुत्रों को कल आ मेरे … Continue reading भवसागर तर जाना

मिसाले-ए-यार

मुकम्मल कोशिशें जारी रखते हैं जो उन्हे फैज कहा करते हैं किस्मत साथ दे कोशिशें देख जिनकी उन्हे मेरा यार कहा करते हैं।  साथ चले हैं खड़े  सहारा बने एक दूसरे का हम दोनो नजारे ये दोस्ती के देख लोग बखूबी जला करते हैं।  अभी तो सफर का पहला पड़ाव भी नहीं आया जिंदगी में … Continue reading मिसाले-ए-यार

आदत

दिमाग दौड़ाने की आदत से मजबूर आवाम है यहाँ सिर्फ फायदा उठा लेने की आदत है यहाँ। सभी कर्मो का हिसाब होता इसी जग में कर्मो का फल मिले तो रोने की आदत है यहाँ। भूलकर आपबीती सब मुस्कुरा दिया करते हैं ख्वाबों में रहकर जीने की आदत है यहाँ। कुछ लम्हे जो बचा लिया … Continue reading आदत

मेरी माँ मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ

सुबह सवेरे उठते ही सारा जग राम राम करे में उठते ही   तुम्हें प्रणाम करता हूँ , ध्यान धर तुम्हारा  हर काम आरम्भ करता हूँ , सभी कुछ अच्छा हो जाता  जब तुम्हारा ध्यान  करता हूँ, रुके काम भी पूरे होते ग्रह चलते अपनी चाल तुम बैठी होगी पूजा करती यह मैं जान लेता हूँ, … Continue reading मेरी माँ मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ

   ज्ञान चक्षु खुल रहे निरन्तर

ज्ञान चक्षु खुल रहे निरन्तर घ्यान धर अग्रसर मै निरन्तर, कष्ट हुए जो मिथ्या थे बाण सा खींच रहे तुम मुझे परस्पर। तुम धारक तुम ही आधार हो मेरा, कभी गांडीव हूँ कभी सन्यासी सा अस्तित्व है मेरा, मेरे सारथी बन बने हो स्वयं सानिध्य मेरा। कृपा अपार संभावनाएं द्रोणाचार्य सी खडी हों सम्मानित हो … Continue reading    ज्ञान चक्षु खुल रहे निरन्तर

राम राम 

।। राम राम।। ॐ नमः हनुमंतेय भय भंजनाय सुुखं कूरू फट स्वाहा।।      * "नाम" राम को कल्पतरू , कलि कल्याण  निवास ।        जो सुमिरत भये भाग्य ते ,   तुलसी  तुलसी  दास ।।     * भय नाशन दुमॅति हरण , कलि में  राम को  "नाम " ।       "तुलसी" … Continue reading राम राम 

मुस्कुराते हुए 

मुस्कुराते हुए जिंदगी मेरी यूंही बीत गई तेरे साथ चलते हुए जिंदगी जीत गई कुछ बारिश सी हुई तो थी राह में तेरे साथ आते ही, जिंदगी गीत गाती चली गई। छाई थी बदरी  जहाँ वहांँ डगर पनघट की थी चले आए हम वहाँ तू खड़ी गागर भर रही थी गागर की किस्मत देख हमें … Continue reading मुस्कुराते हुए