मेरी माँ मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ

सुबह सवेरे उठते ही सारा जग राम राम करे में उठते ही   तुम्हें प्रणाम करता हूँ , ध्यान धर तुम्हारा  हर काम आरम्भ करता हूँ , सभी कुछ अच्छा हो जाता  जब तुम्हारा ध्यान  करता हूँ, रुके काम भी पूरे होते ग्रह चलते अपनी चाल तुम बैठी होगी पूजा करती यह मैं जान लेता हूँ, … Continue reading मेरी माँ मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ

   ज्ञान चक्षु खुल रहे निरन्तर

ज्ञान चक्षु खुल रहे निरन्तर घ्यान धर अग्रसर मै निरन्तर, कष्ट हुए जो मिथ्या थे बाण सा खींच रहे तुम मुझे परस्पर। तुम धारक तुम ही आधार हो मेरा, कभी गांडीव हूँ कभी सन्यासी सा अस्तित्व है मेरा, मेरे सारथी बन बने हो स्वयं सानिध्य मेरा। कृपा अपार संभावनाएं द्रोणाचार्य सी खडी हों सम्मानित हो … Continue reading    ज्ञान चक्षु खुल रहे निरन्तर