भवसागर तर जाना

जननी मेरी तुम सर्व प्रथम पूज्यनीय हो मेरे लिए नित्य चरण वन्दन करना तेरा नियम हो मेरे लिए। जीवन यहां यापन हो रहा, कर्म कारण बोध सब है मुझको तुम्हारे समाचार मिलना अन्तर मन की आवाज हो मेरे लिए। अकेले ना समझना वहाँ खुद को, दुख तुम्हारे हैं ज्ञात तेरे पुत्रों को कल आ मेरे … Continue reading भवसागर तर जाना