तू रख चित्त शांत और हावभाव में प्यार

चक्रवात सा आया है सब धुमिल सा हुआ है ठूंठता किसे नजर नहीं कुछ आता   हाथ प्रभू का बस पकडे़ है।  ---- सन्दर्भों में बीते हैं साल पीड़ा में है तुम्हारा लाल गठबन्धन जिससे बांधा तुमने है उसका सालों से बुरा हाल।  --- डांट नहीं प्यार चाहिए मुझको छडी़ नहीं गोद चाहिए मुझको परिवार मेरा … Continue reading  तू रख चित्त शांत और हावभाव में प्यार

चुन चुन कर

सुन्दर पंकतियों मे पिरोए अहसास लाया हूँ इस जिंदगी मे सुलझे अनुभव लाया हूँ कुछ खट्टी कुछ मीठी सी होती है जिदंगी यूं तो चुन चुन कर तेरे लिए ये अल्फाज़ लाया हूँ।  धैर्य खो देते हैं हम जब देती है सबक जिंदगी उलझते हैं और जब होती सख्त है ये जिंदगी श्रद्धा और सब्र … Continue reading चुन चुन कर