माया है यह

मधुशाला है एक दलदल , धंसते जाना  है  वहीं लालच वहीं माया,  फँसते जाना है  अज्ञानता से मोहवश लगता यही है  प्रेम अपार ये काम मद मोह सब, माँगे समय और कुंध विचार माया है यह, नहीं समभले तो करेगी तिरस्कार।   - - - - - - -  कर्म में  लगे सभी  जन करते  अपना उद्धार  नए आयाम पाकर भी, प्रयास करें  अपार नारायण नाम नहीं मुखपर, माया से हुआ है प्यार  समझदार … Continue reading माया है यह

क्यों न होगी

चन्द लम्हों को अपने समेट, बयां जो कर बैठे हो नाम उसका, तुम्हारी वाहवाही क्यों न होगी,  दिल चीर कर जख्मों को दिखा जो दोगे अगर, तुम्हारी चाहत क्यों न होगी। ----- दास्तां लिखा नहीं करते, हाल ए दिल तो यूंही जाहिर हुआ करते हैं गैरों में रह कर भी, तुम संग दिल न बने, … Continue reading क्यों न होगी

क्यों चल रहा तू करता संग्राम सा

किल्लतों में जीता मरता जरूरतों की झोली भरता कहीं मुस्कराना या फिर कहीं छुपाना यही है तेरा एक अंदाज सा क्यों चल रहा तू करता संग्राम सा।  ------ अग्रसर है दुनिया की भीड़ में दिखता नहीं है पर पीड़ में छुपाए आँसुओं की झील सी आते हैं ये पल,  लिए नया अंदाज सा क्यों चल … Continue reading क्यों चल रहा तू करता संग्राम सा