सवेरा

भई भोर सवेरा जाग उठा तू त्याग निद्रा को जाग उठा अब बारी योग करने की कुछ ध्यान कुछ कसरत करने की जब अस्तित्व निर्मल होता है तब सवेरा अच्छा होता है।  ...... माँ का आशिर्वाद जब प्रातः मिले पिता से कुछ ज्ञान जब प्रातः मिलें पूरे दिन की जब व्याख्या हो शुभ कर्मों की … Continue reading सवेरा

अटल जी की दीवाली 

कविता अटलजी की है , अतिशय सुंदर ..... .......  जब मन में हो मौज बहारों की चमकाएँ चमक सितारों की, जब ख़ुशियों के शुभ घेरे हों तन्हाई  में  भी  मेले  हों, आनंद की आभा होती है  *उस रोज़ 'दिवाली' होती है ।* .......    जब प्रेम के दीपक जलते हों   सपने जब सच में … Continue reading अटल जी की दीवाली 

तारनहार

नारायण के नाम ले, जुग जुग भयो संसार जप तप सब व्यर्थ गया, यूँही दूर भयो अंधकार। राम राम करत नाही, दुख के विवरण देत अन्भयास ओंकार की चाल पर, पंच तत्व भी करत अभ्यास। सुन साधो राम नाम तू जपता चल,  चाहे हो सुख अपार गृह चाल बदल जावे जब, राम नाम तब तारनहार। … Continue reading तारनहार