चिरान्नद

नारायण का नाम लिजीए सार्थक अपने काम किजीए, रख विश्वास आगे बढिए एक नया संसार गढिए, होए है जब तिहारे मन में उजियारा तब जगत लगे भया सब हमारा, मुस्कान मन्द मन्द सी छाई है दुश्मनी निभाने वाला लगे भाई है, भक्ति है कान्हा की अनूठी चाहे हो आन्नद चाहे आस हो झूठी, पकड़ हाथ … Continue reading चिरान्नद

माँ

माँ कबीर की साखी जैसी तुलसी की चौपाई-सी माँ मीरा की पदावली-सी माँ है ललित रुबाई-सी। माँ वेदों की मूल चेतना माँ गीता की वाणी-सी माँ त्रिपिटिक के सिद्ध सूक्त-सी लोकोक्तर कल्याणी-सी। माँ द्वारे की तुलसी जैसी माँ बरगद की छाया-सी माँ कविता की सहज वेदना महाकाव्य की काया-सी। माँ अषाढ़ की पहली वर्षा सावन … Continue reading माँ

शहर

*तेरी बुराइयों* को हर *अख़बार* कहता है, और तू मेरे *गांव* को *गँवार* कहता है // *ऐ शहर* मुझे तेरी *औक़ात* पता है // तू *चुल्लू भर पानी* को भी *वाटर पार्क* कहता है // *थक* गया है हर *शख़्स* काम करते करते // तू इसे *अमीरी* का *बाज़ार* कहता है। *गांव* चलो *वक्त ही … Continue reading शहर

दोस्त

देखी जो नब्ज मेरी, हँस कर बोला वो हकीम : "जा जमा ले महफिल पुराने दोस्तों के साथ, तेरे हर मर्ज की दवा वही है।" दोस्तो से रिश्ता रखा करो जनाब... ये वो हक़ीम हैं जो अल्फ़ाज़ से इलाज कर दिया करते हैं। खींच कर उतार देते हैं उम्र की चादर, ये कम्बख्त दोस्त... कभी … Continue reading दोस्त