ख्वाब 

अश्कों के बहने से जो सैलाब आया था उनमें हमने उस खुदा को पाया था। ____ रहनुमा बन्ने वाले बहुत मिले हमे गुमराह करना उनकी फितरत पाया था। ___ जूझते सब्र रखे हम बढते रहे बस उसकी खुदाई में हमने खुद को पाया था। ___ आज हम खडे़ हैं मुस्कान भरे इन लम्हों में महाकाली … Continue reading ख्वाब 

तुम्हारी ज़रा-नवाज़ी के क़ायल हुए हम ऐसे

तुम्हारी ज़रा-नवाज़ी के क़ायल हुए ऐसे जैसे बर्फ़ किसी मय में मिल पिघले । आए थे तेरे कूचे पर बेख़बर यूँ तो जैसे खुदा की तलाश में जोगी चल निकले । थाम कर हाथ बैठा दिया मैखाने में यूँ जैसे मय की तासीर को परख हल निकले। एक शोख़ शमा इधर जलने को है और … Continue reading तुम्हारी ज़रा-नवाज़ी के क़ायल हुए हम ऐसे

कहाँ है वो जगह जहाँ सुकून-ए-जहाँ मिलते हैं

कहाँ है वो जगह जहाँ सुकून-ए-जहाँ मिलते हैं दिखाते सभी वो मंज़र, जहाँ सभी मसरूफ मिलते है । हम भी निकले हैं उस गुरु की खोज में कहते हैं शरण में उसकी, खुदा मिलते हैं । पहुँचा हूँ मैखाने में अभी, ना समझना मुझे शराबी यहाँ दिल से निकले आँसूओं के, हिसाब मिलते है । … Continue reading कहाँ है वो जगह जहाँ सुकून-ए-जहाँ मिलते हैं

सहिष्णुता

जीवन के सात रंग यही कहे इंसान कभी ख़ुशी कभी ग़म दगा और इल्ज़ाम यही रास्ते पर चल कर ऊँचा रखे स्थान कहाँ गयी सहिष्णुता क्या कर रहा इंसान । अपनो से ही कर दग़ा पाए सुख चैन खोया जो जीवन का सुख नासमझ इंसान रोया जब समय पलट आया समान कहाँ गयी सहिष्णुता क्या … Continue reading सहिष्णुता

पूर्णविराम

जीवन चक्र में फँस उद्वेग में चलता रहा, अर्धसत्य के सत्यापन को पूर्णविराम समझता रहा, इंसान की यही कहानी जीवन चक्र में फँस उद्वेग में चलता रहा। जीवन पथ के उतार चढ़ाव रितियों की ऊँच नीच में बढ़ता हुआ चलता रहा, विघन आए जब ना रुका वो ना थमा वो जीवन चक्र में फँस उद्वेग … Continue reading पूर्णविराम

अज्ञानता और ढकोसला

बन्ध रहे पुराने बन्धन रीती रिवाजों के ये सभी मनोरंजन किया ये, न किया वो, तू कैसा है बदजात कर रहा ठीक है, पर बड़ो की नहीं मानी बात कैसे करें पार,  ये है अज्ञानता और ढकोसलों की दीवार।  ----------- पुराने परिवारों के हालात अलग थे सभी लोगों  से मुलाकात अलग थे छूट जाता अगर … Continue reading अज्ञानता और ढकोसला

उल्लेखनीय

इस जीवन की यही कहानी , कुछ नयी कुछ पुरानी करते सभी यहाँ कुछ प्रयास ढूँढते रहते एक आस, क्या करें ऐसा जिसे देख आयें सभी पास, उल्लेखनीय हो कर्म ऐसा ये हो सफल प्रयास । मैं भी खड़ा उद्वेग में करता रहूँ विश्लेषण , होता क्या है उल्लेखनीय कोई आए समझाए, हर तरफ़ जब … Continue reading उल्लेखनीय