ख्वाब 

अश्कों के बहने से जो सैलाब आया था उनमें हमने उस खुदा को पाया था। ____ रहनुमा बन्ने वाले बहुत मिले हमे गुमराह करना उनकी फितरत पाया था। ___ जूझते सब्र रखे हम बढते रहे बस उसकी खुदाई में हमने खुद को पाया था। ___ आज हम खडे़ हैं मुस्कान भरे इन लम्हों में महाकाली … Continue reading ख्वाब 

तुम्हारी ज़रा-नवाज़ी के क़ायल हुए हम ऐसे

तुम्हारी ज़रा-नवाज़ी के क़ायल हुए ऐसे जैसे बर्फ़ किसी मय में मिल पिघले । आए थे तेरे कूचे पर बेख़बर यूँ तो जैसे खुदा की तलाश में जोगी चल निकले । थाम कर हाथ बैठा दिया मैखाने में यूँ जैसे मय की तासीर को परख हल निकले। एक शोख़ शमा इधर जलने को है और … Continue reading तुम्हारी ज़रा-नवाज़ी के क़ायल हुए हम ऐसे

कहाँ है वो जगह जहाँ सुकून-ए-जहाँ मिलते हैं

कहाँ है वो जगह जहाँ सुकून-ए-जहाँ मिलते हैं दिखाते सभी वो मंज़र, जहाँ सभी मसरूफ मिलते है । हम भी निकले हैं उस गुरु की खोज में कहते हैं शरण में उसकी, खुदा मिलते हैं । पहुँचा हूँ मैखाने में अभी, ना समझना मुझे शराबी यहाँ दिल से निकले आँसूओं के, हिसाब मिलते है । … Continue reading कहाँ है वो जगह जहाँ सुकून-ए-जहाँ मिलते हैं