जीता रहा इंसान

Not my poetry.. Anonymous writer उल्हजहनोँ मेँ उल्हज कर जीता रहा इंसान जीने का सलीखा अंततक कभी सीखा नहीं उम्रभर अंधेरों से ही सदाँ लड़ता रहा इंसान जलता चिराग हाथ मेँ लेकर कभी चला नहीं अकेला होगया है आदमीं ढूनियां की भीड मेँ ऊजाला कभी करता नहीं खुद की ही नीड मेँ उम्र भर वह … Continue reading जीता रहा इंसान