पायदान

पायदान के बाहर पैर रख कर मुफलिसी के दौर मे दस्तवर खान बिछा कर हम निवाला है बनाते हम उन खुदगरजों को जो आँखे दिखायें आस्तीनो को चढा कर। ------------ हमारी मुस्कुराहट देख कमज़ोरी ना समझाना दिखा आँखें हमे, खुदी है तुम्हारी बुलंद ना समझाना क्योंकि बड़ी हैसियत वाले नर्म मिज़ाज़ रहते हैं उबलते माहोल … Continue reading पायदान