*(हम सब की कहानी )*

*ज़िन्दगी से लम्हे चुरा* *बटुए मे रखता रहा!* *फुरसत से खर्चूगां* *बस यही सोचता रहा।* *उधड़ती रही जेब* *करता रहा तुरपाई* *फिसलती रही खुशियाँ* *करता रहा भरपाई।* *इक दिन फुरसत पायी* *सोचा .......* *खुद को आज रिझाऊं* *बरसों से जो जोड़े* *वो लम्हे खर्च आऊं।* *खोला बटुआ..लम्हे न थे* *जाने कहाँ रीत गए!* *मैंने तो … Continue reading *(हम सब की कहानी )*