सच्ची मोहब्बत

इंसान की फितरत का पता नहीं उसको सच्ची मोहब्बत का पता नहीं, उस उम्र की क्या बात करें दोस्त जिसमे उसे अपने अपनों का पता नहीं । ****** पाता है नाकामयाबी ये यूंही हर पल उम्मीद का दामन छोड़ना सीखा ही नहीं रहती है जिंदगी में उसके बेपरवाही से हलचल ता उम्र उसकी नज़रें इसलिए … Continue reading सच्ची मोहब्बत

ऐ शहर

1997 से पहले जन्म वाले जरुर पढ़े बहुत अच्छी फीलिंग आयेगी ☺ . हम लोग, जो 1947 से 1997 के बीच जन्में है, We are blessed because, 👍 हमें कभी भी 👌हमारें माता- पिता को हमारी पढाई को लेकर कभी अपने programs आगे पीछे नही करने पड़ते थे...! 👍 स्कूल के बाद हम देर सूरज … Continue reading ऐ शहर

मेरी बिटिया

छाया है वो माता की काया है वो पिता की इन्द्र धनुष से सपने उसके थिरकते घर में हैं पैर उसके घर भर देती चह चहा कर वो इठलाती घूमती नखरे दिखाती खुशियां बिखेरती फिरती है वो । ******** उसके बिना ये घर सूना मेरा जग सूना, मेरा मन सूना आती लड़ती झगड़ती यूं रूठती … Continue reading मेरी बिटिया

नारी रे नारी

नारी रे नारी तेरी आंखों में सारी दुनिया है न्यारी, देखें तुझे दुनिया वाले सभी रस के प्याले तूने क्यों नहीं देखे ये भाले, तार तार करते रहते गरिमा नंगी आंखों से करते अंगभंगिमा भूले बैठे हैं खुद की कुल गरिमा, खुद सहेज अस्तित्व को अपने देख और कर पूरे सपने दूर कर तू डर … Continue reading नारी रे नारी

तुम कृष्ण से मिल पाओगे

प्रेम कियो जैसे अलख जगायो, गोपियों संग वो रास रचायो, राधा संग वो बंसी बजायो, सृष्टि रची कैसे ढाई अक्सर में सीखायो।।। ******* मूर्ख संसार कलजुग में फंस्यो, रास लीला को भोग समझयो, समर्पण और विश्वास भुलाई दुर्गा रूप स्त्री काली दृष्टि सुहाई, घर में माँ बहन की चिंता बाहर पराई कन्या देख किंचित नहीं … Continue reading तुम कृष्ण से मिल पाओगे

भाईयों के लिए संदेश

जिंदगी उनकी है भली जहां ये नाजों से है पली, गंगा सी निर्मल मधू सी मीठी नहीं हैं बहने जहां वह घर जैसे बिना आग अंगीठी।। ******** सर्वस्व न्योछावर उन पर जिनकी ये प्यारी बहने, सारे परिवार की दुलारी फीके हैं सभी गहने।। ********* लड़ती कभी ये रूठती हैं कभी मां बाप से तुम्हारे लिए … Continue reading भाईयों के लिए संदेश

स्वातंत्र्य गौरव के अनमोल पल

राष्ट्रकवि दिनकर की अमर पंक्तियों के माध्यम से हमें स्वातंत्र्य गौरव के अनमोल पल देने वालों को नमन- जला अस्थियां बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो चढ़ गए पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल। कलम, आज उनकी जय बोल जो अगणित लघु दीप हमारे तूफानों में एक किनारे, जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन मांगा नहीं … Continue reading स्वातंत्र्य गौरव के अनमोल पल

मेरी परी

सम्मोहित करता स्वरूप तुमहारा हुआ रोम रोम पुलकित हमारा, मृगनयनी सी अंखियां तुम्हारी पलकें जैसे पंखुड़ियाँ तुम्हारी, देख तुम्हे मोहित हुआ हूँ तुम्हे पाकर मैं सुशोभित हुआ हूँ।। ********* बातें तुम्हारी हैं रस घोलती सुनो मेरी बात बस यूं हो बोलती, नखरे तुम्हे आते नहीं बनाने चली आती हो यूंही मुस्कुराहट दिखाने, तुम्हें सुनकर कमाल … Continue reading मेरी परी