अनारकली सी सूरत

दुनिया मे हम जी तो लेते हैं

तबस्सुम सी

खूबसूरती कहां से लाएं,

तुम जो

दुनिया से बेखबर

होकर चले आते हो,

तुम्हें दुनिया की

बेदर्दी की सूरत कैसे दिखाएं,

लाए हैं तुम्हारे लिए

अपने अश्कों को संभाल कर,

तुमने मुंह ही दुनिया से फेर लिया

तो हम तुम्हें खुशियों का

आईना कैसे दिखाएं।

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सोचते जोर देते हैं

अपने जहन पर,

तुम्हें नापने का तसव्वुर

कहां से लेकर आए,

मुग़ल-ए-आज़म होते

तो शायद

आगोश में ही पिघल जाते,

खूबसूरत तेवर तलाश है अब तो

अनारकली सी सूरत के लिए

जिल्ले इलाही सा

रवैया कहां से लाएं।

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