कैफ़ी आज़मी साहब की नज़म , शबाना जी की जुबानी

*_मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता_*

🐋 _ख्वाहिश नहीं मुझे_ _मशहूर होने की,"_ _आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है।_ _अच्छे ने अच्छा और_ _बुरे ने बुरा जाना मुझे,_ _जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना ही पहचाना मुझे!_ _जिन्दगी का फलसफा भी_ _कितना अजीब है,_ _शामें कटती नहीं और_ _साल गुजरते चले जा रहे हैं!_ _एक अजीब सी_ _'दौड़' … Continue reading *_मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता_*

*गुलजार साहब की एक सुंदर कविता*

*गुलजार साहब की एक सुंदर कविता* जिन्दगी की दौड़ में, तजुर्बा कच्चा ही रह गया...। हम सीख न पाये 'फरेब' और दिल बच्चा ही रह गया...। बचपन में जहां चाहा हँस लेते थे, जहां चाहा रो लेते थे...। पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए और आंसुओ को तन्हाई..। हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ … Continue reading *गुलजार साहब की एक सुंदर कविता*

किसी को समझ नहीं आती

चाहतों खत्म नहीं होती मुसीबतें यूं ही बढ़ जाती है, Mails खत्म नहीं होती data input PPT में बढ़ जाती है, Increment और bonus मिल नहीं पाते नौकरी खतरे में पड़ जाती है। कितनी भी मेहनत कर लो तुम growth किसी और को मिल ही जाती है, मेहनत करने वालों की कद्र नहीं होती जी … Continue reading किसी को समझ नहीं आती

मेरा कोई भी दोस्त* *बूढ़ा नहीं हुआ….!

** सच्चाई में ढ़ले हैं , सब अब भी मनचले हैं । कृपा है सब पे रब की , पर्वत से सब खड़े हैं । ना दर्द कोई दिल में , छा जाऐं वो महफिल में । वो सबके काम आयें , जो भी हो मुश्किल में । नहीं कोई है घमंडी , ना ही … Continue reading मेरा कोई भी दोस्त* *बूढ़ा नहीं हुआ….!

पैगाम उस पार नहीं जाता

धूल भरी आंधियों में कुछ नजर नहीं आता, नज़रें इधर-उधर देखती हैं जब तक ये दिल भर नहीं जाता, एक छड़ी जो पकड़ी है इन्सान तो उससे भी सहारा नहीं पाता, जब - जब उसे सनम के दीदार की दरकार होती है, आंखों के सामने से वो नजारा नहीं जाता, हमसफर और हमराज़ जो होते … Continue reading पैगाम उस पार नहीं जाता