*गुलजार साहब की एक सुंदर कविता*

*गुलजार साहब की एक सुंदर कविता* जिन्दगी की दौड़ में, तजुर्बा कच्चा ही रह गया...। हम सीख न पाये 'फरेब' और दिल बच्चा ही रह गया...। बचपन में जहां चाहा हँस लेते थे, जहां चाहा रो लेते थे...। पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए और आंसुओ को तन्हाई..। हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह अन्दाज़ … Continue reading *गुलजार साहब की एक सुंदर कविता*