सो गया

In memory of my beloved brother who left us on 18th December सो गया दरखत अपनी भुजाओं में , खेलकर बड़ा हुआ इन्हीं हवाओं में , तौल न सके तराजू से वाट उसे , उड़ गया कैसे कब इन्हीं हवाओं में। कितने लम्बे हाथ थे जनाव उसके , कैसे द्रुतगामी घोड़े थे मन के उसके, … Continue reading सो गया

*चाय सिर्फ़ चाय ही नहीं होती…*✍🏻

जब कोई पूछता है "चाय पियेंगे" तो बस नहीं पूछता वो तुमसे दूध, चीनी और चायपत्ती को उबालकर बनी हुई एक कप चाय के लिए।✍🏻 वो पूछता हैं... क्या आप बांटना चाहेंगे कुछ चीनी सी मीठी यादें कुछ चायपत्ती सी कड़वी दुःख भरी बातें..!✍🏻 वो पूछता है.. क्या आप चाहेंगे बाँटना मुझसे अपने कुछ अनुभव, … Continue reading *चाय सिर्फ़ चाय ही नहीं होती…*✍🏻

उसका

राम उसका रावण भी उसका फिर भी संसार का भाव नहीं उसका, जीवन उसका मरण भी उसका इंसान की समझ में अस्तित्व नहीं उसका, तांडव उसका ध्यान भी उसका योग और अभ्यास का सार नहीं उसका, ज्ञानियों का ज्ञान उसका, प्रेतों का महाकाल उसका चन्द्रमा का आधार भी उसका संसार का भेद फिर भी नहीं … Continue reading उसका

मजबूर कर दो

हमें सीने से लगाकर हमारी सारी कसक दूर कर दो, हम सिर्फ तुम्हारे हो जाऐ हमें इतना मजबूर कर दो। तनहाई में तड़पा करें मोहब्बत की तासीर इतनी तेज़ कर दो, तुम्हारी हर अंगड़ाई की याद आए हमे इतना मजबूर कर दो । कोशिशें बेकार जाया करती हैं हमारी मुश्किलें दूर कर दो, तुम्हारी यादों … Continue reading मजबूर कर दो

मधुराष्टकं

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् । हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ १ ॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् । चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ २ ॥ वेणु-र्मधुरो रेणु-र्मधुरः पाणि-र्मधुरः पादौ मधुरौ । नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ ३ ॥ गीतं मधुरं पीतं मधुरं … Continue reading मधुराष्टकं