सो गया

In memory of my beloved brother who left us on 18th December सो गया दरखत अपनी भुजाओं में , खेलकर बड़ा हुआ इन्हीं हवाओं में , तौल न सके तराजू से वाट उसे , उड़ गया कैसे कब इन्हीं हवाओं में। कितने लम्बे हाथ थे जनाव उसके , कैसे द्रुतगामी घोड़े थे मन के उसके, … Continue reading सो गया