मुन्सी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता

ख्वाहिश नहीं मुझे_मशहूर होने की,_आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है._ अच्छे ने अच्छा औरबुरे ने बुरा जाना मुझे,_क्यों की जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना ही पहचाना मुझे._ जिन्दगी का फलसफा भीकितना अजीब है,_शामें कटती नहीं और_ _साल गुजरते चले जा रहें है._ एक अजीब सीदौड है ये जिन्दगी,_जीत जाओ तो कई_ … Continue reading मुन्सी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता

हरि ओम शरण जी का भजन

दाता एक राम भिकारी सारी दुनिया दाता एक राम भिकारी सारी दुनिया राम एक देवता पुजारी सारी दुनिया पुजारी सारी दुनिया दाता एक राम..... द्वार पे उसके जाके कोई भी पुकारता परम कृपा दे अपनी भाव से उभरता ऐसे दीना नाथ पे बलिहारी सारी दुनिया दाता एक राम भिकारी सारी दुनिया दाता एक राम..... दो … Continue reading हरि ओम शरण जी का भजन

देवों की महिमा

देवों की महिमा जान सकते नहीं, प्रभु की लीला पहचान सकते नहीं, दुर्लभ कार्य भी यूंही नहीं कर जाते, खुद को भी यूंही संसार में फंसा नहीं पाते, खोजते जिसे दर बदर वह यहीं खुद में छिपा, खंगाल लो जब खुद को प्रभु खुद को भी नहीं सके छिपा।

मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता

🐋 *मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता, जिसके एक-एक शब्द को बार-बार पढ़ने को मन करता है-_* _ख्वाहिश नहीं मुझे_ _मशहूर होने की,"_ _आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है।_ _अच्छे ने अच्छा और_ _बुरे ने बुरा जाना मुझे,_ _जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना ही पहचाना मुझे!_ _जिन्दगी का फलसफा भी_ … Continue reading मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता