मुन्सी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता

ख्वाहिश नहीं मुझे_मशहूर होने की,_आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है._ अच्छे ने अच्छा औरबुरे ने बुरा जाना मुझे,_क्यों की जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना ही पहचाना मुझे._ जिन्दगी का फलसफा भीकितना अजीब है,_शामें कटती नहीं और_ _साल गुजरते चले जा रहें है._ एक अजीब सीदौड है ये जिन्दगी,_जीत जाओ तो कई_ … Continue reading मुन्सी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता