देखी तोरी सूरत जबहुं

देखी तोरी सूरत जबहुं आनंदित मन होई तबहुं, मुख मंडल मुस्कान जब देखाहुं चित्त परिचित होई है तबहुं। मन चंचल चित्त मधुबन वन भटकयो बंसी सुन तिहारी मृग नाचत जब दिख्यो, राधा संग तुम तब रास रचाए सबहुं ओर नंदन वन में मैं भटकयो। श्याम तुम चित्त कर हो ठहरे सुध बुध खोए मैं मोह … Continue reading देखी तोरी सूरत जबहुं

उसकी जरा सी दरख्वास्त पर

उसके रहम को क्या नाम दें हम तो यूंही इंतेहनों से गुजर आए हैं, जरा नवाजी निभा दी थी उन्होंने मोहब्बत का उसे नाम दे आए हैं। इश्क़ ये नहीं आसान इतना तो समझ लिया हम क्या करें हम तो उसे दिल ही दे आए है, बड़े बडों के मशवरे ठुकरा दिए हमने अब उसकी … Continue reading उसकी जरा सी दरख्वास्त पर