जो कह दिया वह शब्द थे

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एक बहुत ही सुंदर कविता*

दो बार पढे और आनन्द लें

जो कह दिया वह शब्द थे ;
जो नहीं कह सके
वो अनुभूति थी l
और,
जो कहना है मगर ;
कह नहीं सकते,
वो मर्यादा है l

जिंदगी का क्या है ?
आ कर नहाया,
और,
नहाकर चल दिए l

बात पर गौर करना– —-

पत्तों सी होती है
कई रिश्तों की उम्र,
आज हरे——-!
कल सूखे ——-!

क्यों न हम,
जड़ों से;
रिश्ते निभाना सीखें l

रिश्तों को निभाने के लिए,
कभी अंधा,
कभी गूँगा,
और कभी बहरा ;
होना ही पड़ता है l

बरसात गिरी
और कानों में इतना कह गई कि———!
*गर्मी हमेशा किसी की भी नहीं रहती l

नसीहत,
नर्म लहजे में ही
अच्छी लगती है ।
क्योंकि,

दस्तक का मकसद,
दरवाजा खुलवाना होता है;
तोड़ना नहीं l

घमंड———–!
किसी का भी नहीं रहा,
टूटने से पहले ,
गुल्लक को भी लगता है कि ;
सारे पैसे उसी के हैं

जिस बात पर ,
कोई मुस्कुरा दे;
बात ——–!
बस वही खूबसूरत है l

थमती नहीं,
जिंदगी कभी,
किसी के बिना l
मगर,
यह गुजरती भी नहीं,
अपनों के बिना l

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