रहमत खुदा की यूँही हुआ नहीं करती

जज़्बातों में ना हो ईमानदारी तो रहमत खुदा की हुआ नहीं करती , कितने भी जतन कितने भी क़त्ल कर लो बेमानी जज़्बातों से मोहब्बत जवान हुआ नहीं करती। इस जमाने के चाहे सरताज बन जाओ बिना खुदा की इबादत के जन्नत नसीब हुआ नहीं करती । इस हुस्न पर कितना भी लूटा दो हीरे … Continue reading रहमत खुदा की यूँही हुआ नहीं करती