गृहस्थी

अपनी गृहस्थी को कुछ इस तरह बचा लियाकभी आँखें दिखा दी कभी सर झुका लिया आपसी नाराज़गी को लम्बा चलने ही न दियाकभी वो हंस पड़े कभी हमने मुस्करा दिया रूठ कर बैठे रहने से घर भला कहाँ चलते हैंकभी उन्होंने गुदगुदा दिया कभी मैंने मना लिया खाने पीने पे विवाद कभी होने ही न … Continue reading गृहस्थी