बस शून्य सा सब कुछ हो रहा

कुछ काला कुछ उज्ला कुछ पीछे कुछ आगे समय परिवर्तन हो रहा । स्थिर्ता बुद्धि और विवेक ना तुलना है ना परिकल्पना बस शून्य सा सब कुछ हो रहा । ना पराजय का भय ना विजय का उद्घोष बस शून्य सा सब कुछ हो रहा । चित्त स्थिर शंका शून्य और काली की मुस्कुराहट बस … Continue reading बस शून्य सा सब कुछ हो रहा