जिंदगी by गुलज़ार साहब

-कभी तानों में कटेगी,कभी तारीफों में;ये जिंदगी है यारों,पल पल घटेगी !! पाने को कुछ नहीं,ले जाने को कुछ नहीं;फिर भी क्यों चिंता करते हो,इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी! बार बार रफू करता रहता हूँ,जिन्दगी की जेब !!कम्बखत फिर भी,निकल जाते हैं…,खुशियों के कुछ लम्हें !! -ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही…ख़्वाहिशों … Continue reading जिंदगी by गुलज़ार साहब

मुझको uncle कहने वालों

😂😜 U N C L E 😜😂 उम्र 40 पार है लेकिनशक्ल हमारी 30 के जैसी।मुझको uncle कहने वालो,तुम्हारी ऐसी की तैसी।।। बेटी के कॉलेज गया तो,टीचर देख मुझे मुस्कुराई।।।बोली क्या मेनटेनड हो मिस्टर??पापा हो,पर लगते हो भाई।।। क्या बतलाऊँ उसने फिर,बातें की मुझ से कैसी कैसी।।मुझको uncle कहने वालों,तुम्हारी ऐसी की तैसी।।।। पडोसन बोली, … Continue reading मुझको uncle कहने वालों

40 पार की उम्र

उम्र 40 पार है लेकिनशक्ल हमारी 30 के जैसी।मुझको uncle कहने वालो,तुम्हारी ऐसी की तैसी।।। बेटे के कॉलेज गया तो,टीचर देख मुझे मुस्कुराई।।।बोली क्या मेनटेनड हो मिस्टर??पापा हो,पर लगते हो भाई।।। क्या बतलाऊँ उसने फिर,बातें की मुझ से कैसी कैसी।।मुझको uncle कहने वालों,तुम्हारी ऐसी की तैसी।।।। पडोसन बोली, सेकंड हैंड हो,लेकिन फ़्रेश के भाव बिकोगे।बस … Continue reading 40 पार की उम्र

कृष्ण का गांधारी को प्रत्युत्तर

क्रोधित, आवेशित गांधारी गिर पड़ी धरा पर श्रापित कर, अधचेतन, बिलख रही भू पर वह विगत काल को शोषित कर | थे कृष्ण सुन रहे श्राप- शब्द हँस रहे मृदुल, मन ही मन में, आ गए तुरत कुरुक्षेत्र मध्य हत योद्धाओं के कानन में | बोले गांधारी को हाथ जोड़ माते ! मैं श्राप ये … Continue reading कृष्ण का गांधारी को प्रत्युत्तर

🌷 पितरों को नमन🌷

वो कल थे तो आज हम हैंउनके ही तो अंश हम हैं.. जीवन मिला उन्हीं सेउनके कृतज्ञ हम हैं.. सदियों से चलती आयीश्रंखला की कड़ी हम हैं.. गुण धर्म उनके ही दियेउनके प्रतीक हम हैं.. रीत रिवाज़ उनके हैं दियेसंस्कारों में उनके हम हैं.. देखा नहीं सब पुरखों कोपर उनके ऋणी तो हम हैं.. पाया … Continue reading 🌷 पितरों को नमन🌷

अतीत के मुहाने से

अतीत के मुहाने से झांकती परछाईं कुछ अच्छी कुछ दुखदाई हैं सौदाई, झुकते हुए से पेड़ों की तन्हाई और खट्टे मीठे फलों की तराई, बागों में खेलते हुए टहनियों पर लटकना, आमों की मिठास को पेड़ों पर ही चखना, बाहर की हर बात घर में बकना, कोई सुने या ना सुने अपनी बात पूरी करना। … Continue reading अतीत के मुहाने से

जीवन मंत्र की खोज में

जीवन मंत्र की खोज में जीने का अवसर खो दिया, यंत्र तंत्र और मंत्र साध के जीने का अर्थ ही खो दिया। जीवन के संघर्ष देख दूसरों के कथन से खुद को अनुबंधित किया, जीवन शैली हो ऐसी सोच कर हजार जतन किया। धन संपत्ति कमा कर खूब नाम दुनिया में किया, खुदा को गंवा … Continue reading जीवन मंत्र की खोज में

जन्म अष्टमी

कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष प्रेम का सागर लिखूं!या चेतना का चिंतन लिखूं!प्रीति की गागर लिखूं,या आत्मा का मंथन लिखूं!रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित,चाहे जितना लिखूं…. ज्ञानियों का गुंथन लिखूं ,या गाय का ग्वाला लिखूं..कंस के लिए विष लिखूं ,या भक्तों का अमृत प्याला लिखूं।रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित चाहे जितना लिखूं…. पृथ्वी का मानव लिखूं … Continue reading जन्म अष्टमी