पाय गयो रघुवीर

मन शीतल जल भया पाय गयो रघुवीर, मूढ़ बनत फिरता रहा जब जपा नाम रघुवीर, दस कंधर ज्ञानी हुआ खुद चले आए रघुवीर, दस सिर जानत अवगुण थे मिटावे पीढ रघुवीर, परम सत्य को जानिए अंतर्मन जब होए अधीर , अवगुण जान स्वयं के चरण शरण जाओ रघुवीर।

चिन्तन चित्त को चाहिए

चिन्तन चित्त को चाहिए तनको चाही नीर, मन को भौतिक सुख की इच्छा आत्मा बने फ़क़ीर । क़हत पुलसत्य सुनो भाई साधों बन रहे बड़े बड़े फ़क़ीर , भजन पूजन से कछु मिले नहीं ना हो भाव फ़क़ीर । खुदा कहो या शिव होते वही क़रीब , जो जन सेवा करे बनावे नाहीं लकीर ।

रहमत खुदा की यूँही हुआ नहीं करती

जज़्बातों में ना हो ईमानदारी तो रहमत खुदा की हुआ नहीं करती , कितने भी जतन कितने भी क़त्ल कर लो बेमानी जज़्बातों से मोहब्बत जवान हुआ नहीं करती। इस जमाने के चाहे सरताज बन जाओ बिना खुदा की इबादत के जन्नत नसीब हुआ नहीं करती । इस हुस्न पर कितना भी लूटा दो हीरे … Continue reading रहमत खुदा की यूँही हुआ नहीं करती

ज़िंदगी के ये पल

चंद लम्हों में सिमटी ये ज़िंदगी, इसे गुज़ार लो या संवार दो। अपने हों संग तो है ख़ुशनुमा ज़िंदगी, छोटी बातों को यादों से निकाल दो। फूल खिलते हैं नूर ए नज़र बनकर पेड़ को जब जल से निकास दो । उड़ने दो हवाओं में पंछी बनकर पंखों को इनके और संवार दो । घनी … Continue reading ज़िंदगी के ये पल

यह चिता नहीं यह काया थी

यह चिता नहीं यह काया थीजो भस्म हुई बस माया थीमोह मिथ्या का उचाट यही हैमणिकर्णिका का घाट यही है.. यहीं चिता में इच्छा सोती हैयहीं दीप्त आत्मा होती हैजब सौभाग्य तुझे बुलाएगादेखना तू भी काशी आएगा.. पापों का बोझ निगलती हैयह शुद्ध अनामय करती हैअग्नि का स्पर्श जैसे पारसगंगा और ये शहर बनारस.. इच्छा … Continue reading यह चिता नहीं यह काया थी

हमारे तीन लोक🙏🙏🙏

प्रभु श्री हरि तीनों लोकों के स्वामी हैं। महादेव तीनों लोकों को भस्म करते हैं और सृजन से पालन को क्षमता भी रखते हैं।महाकाली तीनों लोकों को परम शक्ति हैं।शास्त्रों में है कि अगर हम अपने अंदर किसी भी भगवान को जाग्रत करें तो सृष्टि में वही कर सकते है जिसे जाग्रत किया। जैसे कि … Continue reading हमारे तीन लोक🙏🙏🙏

चांद की शिकायत

🌝चाँद को भगवान् राम से यह शिकायत है की दीपवली का त्यौहार अमावस की रात 🌚 में मनाया जाता है और क्योंकि अमावस की रात में चाँद निकलता ही नहीं है इसलिए वह कभी भी दीपावली✨ मना नहीं सकता। यह एक मधुर कविता है कि चाँद किस प्रकार खुद को राम के हर कार्य से … Continue reading चांद की शिकायत

मै मै नहीं परन्तु मै मै ही हूं।

महाकाल की चेतना और महाकाली कि शक्ति, नारायण सा तेज और लक्ष्मी सी शीतलता, देवों को प्यारे और गणों में दुलारे, सूंड जिनकी सिर्फ सूंड नहीं स्वयं सभी चक्रों का निवास वहीं, मेरे सिर में सहरार से शुरू हो अंत मूलाधार तक विस्तार होता, उस सूंड की ऐसी गरिमा, शरीर स्वयं सुव्यवस्थित हुआ है जैसे, … Continue reading मै मै नहीं परन्तु मै मै ही हूं।