मित्र! ओ मित्र 

इच्छाओं से उत्पन्न हो हंसी की रचना करते हो तुम, मेरे दृष्टिकोण को जान कर सार्थक करते हो तुम, मेरी इचछाओं के अनूकूल रचनात्मक हो दिखते हो तुम| ज्ञान विज्ञान से परिपूर्ण हो ढूंढता फिरा चहुंओर वो हंसी के गोलगपपे हो तुम, बैठे बाध्य मेरी सोच के अनुरूप मुझे संभाले, मेरा ढांढस बांधे मित्र हो … Continue reading मित्र! ओ मित्र 

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वक्त गुजरता है देर नहीं लगती

बदल जाता है समा, और वक्त गुजरते भी देर नहीं लगती कभी मुस्कराये थे तुम किसी पर,  जहाँ तुम पर हंसे, इसमे देर नहीं लगती।  .... यहाँ नूर बरसते हैं उसके बन्दों पर खुदा की कायनात है ये, जगह मिलने में देर नहीं लगती।   मिट्टी में मिलकर भी मदद करते रहे गैरों की खुदा … Continue reading वक्त गुजरता है देर नहीं लगती

कौन

मैं रूठा ,तुम भी रूठ गए फिर मनाएगा कौन ? आज दरार है , कल खाई होगी फिर भरेगा कौन ? मैं चुप , तुम भी चुप इस चुप्पी को फिर तोडे़गा कौन ? छोटी बात को लगा लोगे दिल से , तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ? दुखी मैं भी और  तुम भी बिछड़कर , सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन ? … Continue reading कौन

 तू रख चित्त शांत और हावभाव में प्यार

चक्रवात सा आया है सब धुमिल सा हुआ है ठूंठता किसे नजर नहीं कुछ आता   हाथ प्रभू का बस पकडे़ है।  ---- सन्दर्भों में बीते हैं साल पीड़ा में है तुम्हारा लाल गठबन्धन जिससे बांधा तुमने है उसका सालों से बुरा हाल।  --- डांट नहीं प्यार चाहिए मुझको छडी़ नहीं गोद चाहिए मुझको परिवार मेरा … Continue reading  तू रख चित्त शांत और हावभाव में प्यार

पिता श्री – आपका आगमन 

अंग्रेजों के बनाये कुछ त्योहार भी अच्छे होते हैं रिश्तों में पिरोए हुए त्योहार अच्छे होते हैं  आज father's day पर आपका आगमन मेरे यहाँ  ऎसे आशिर्वाद के सूचक भी बहुत अच्छे होते हैं।  ___ आपकी छत्र ओ छाया सिर पर आशिर्वाद है आपका आना, पीठ थपथपाना आशिर्वाद है आपको super dad क्यों न कहें … Continue reading पिता श्री – आपका आगमन 

चुन चुन कर

सुन्दर पंकतियों मे पिरोए अहसास लाया हूँ इस जिंदगी मे सुलझे अनुभव लाया हूँ कुछ खट्टी कुछ मीठी सी होती है जिदंगी यूं तो चुन चुन कर तेरे लिए ये अल्फाज़ लाया हूँ।  धैर्य खो देते हैं हम जब देती है सबक जिंदगी उलझते हैं और जब होती सख्त है ये जिंदगी श्रद्धा और सब्र … Continue reading चुन चुन कर

रुखसत 

जानेवाले इस कदर  खुदगर्ज हैं होते,  अपनी बातों से  दिल में बीज हैं बोते।  कुछ खास तो  बयां नहीं करना मुझको पर जिन्हे छोड़ हम रुखसत हो रहे,  कुछ उदास और कुछ हैं रोते।  क्या कहें क्या समझाएं  तुमको ऐ यार मेरे आँसू कुछ हमने भी हैं संजोए,  हम भी तो तुम्हारा साथ हैं खोते।  … Continue reading रुखसत 

माता पिता की वन्दना 

हे माँ, तुम्हारे चरण स्पर्श, परम पूज्य तुम महालक्ष्मी हो,  हे पिता, तुम्हारे चरण स्पर्श, परम पूज्य तुम नारायण हो।  आशिर्वाद लिये चल रहा मै, नितदिन अब पूजा है,  तुम्हारे प्यार एवं आशिर्वाद की गंगा पहुँची वैकुण्ठ है।  देख मेरी दशा और पत्नी की दुआओं को मिश्रित होते उस गंगा में,  महावीर ने आगे बढ़कर … Continue reading माता पिता की वन्दना 

बेमौसम बरसात

गर्मी का मौसम है  या बरसात में नाचेगा मोर,  सर्दी का मौसम है  या पतझड़ की होगी भोर,  रेत सा निकल समय  सांझ के पहर में अटक रहा,   स्वयं को देखता तो दुखद धारावाहिक सा जैसे चल रहा,  आँसुओं से भरा गागर हर पल में जीवन जैसे छलक रहा,  किस मुख इबादत करूं उसकी हर … Continue reading बेमौसम बरसात

खुशियाँ बाँटती जिंदगी 

जज्बातों में उलझी जिंदगी ख्वाबों में लिपटी जिंदगी कुछ हंसना कुछ हंसाना लम्हा लम्हा चलती जिंदगी।  यूं तो रोते भी हैं लोग मुस्कुराने के बहाने ढूंढते लोग कभी बहुत सताती भी है जिंदगी  फिर भी धैर्य धरते हैं लोग।  पंछियों की चहचहाहट में जिंदगी कुत्तों की प्यार से हिलती पूंछ में जिंदगी अगर ढूंढें सिर्फ … Continue reading खुशियाँ बाँटती जिंदगी