अनपढ़ सा हूं मै

अनपढ़ सा हूं मै, फिर भी ज्ञानवान हूं पल में तोला पल में मासा,फिर भी धैर्यवान हूं मै सब कुछ देखता और परखता, मुस्कुराहटों में लिपटा, सुखधम हूं मै अनपढ़ सा हूं मै, फिर भी ज्ञानवान हूं।। अपना सिर्फ सोचता हूं, फिर भी भाग्यवान हूं मै किसी को कोसता भी हूं, फिर भी क्षमावान हूं … Continue reading अनपढ़ सा हूं मै

Advertisements

कलियुग में corona

ज्ञानी का ज्ञान व्यर्थ अज्ञानी का अभिमान व्यर्थ सृष्टि के साथ परम पुरुष खड़े फिर भी परमात्मा का नाम व्यर्थ। ------------------ शिव का ध्यान व्यर्थ नारायण का नाम व्यर्थ खुद को समझे नहीं मनुष्य राम नाम का जाप व्यर्थ। ----------------- सृष्टि खुद हो रही संतुलित दिख रहा रूप अतुलित धनाढ्यों का धन व्यर्थ मजदूर की … Continue reading कलियुग में corona

लॉकडाउन ने खुद से मुलाक़ात करवाई है

कैसे अपनो के दिल की गहराइयों में और उतर जाएं, कहां शुरू करें और कहां ख़तम हो जाएं, इस सुंदर श्रृष्टि के आलिंगन में क्या फिर से अपनी ही दौड़ में खो कर रह जाएं।   लॉकडाउन ने खुद से मुलाक़ात करवाई है कहां शुरू करें और कहां ख़तम हो जाएं, जब खड़े थे सफलता … Continue reading लॉकडाउन ने खुद से मुलाक़ात करवाई है

एक अछूता कवितामय प्रयोग🙏

अचानक आ कर मुझसे,इ ठलाता हुआ पंछी बोला ईश्वर ने मानव को तो-उत्तम ज्ञान-दान से तौला ऊपर हो तुम सब जीवों में-ऋषितुल्य अनमोल,एक अकेली जात अनोखी ऐसी क्या मजबूरी तुमको-तरस गयी होंठों पे शोख़ी! और सताकर कमज़ोरों को,अंग तुम्हारा खिल जाता है;अहः तुम्हें मिल जाता है कहो मैंने- कि कहो,आज सम्पूर्ण गर्व से कि- हर अभाव में भी,घ र तुम्हारा … Continue reading एक अछूता कवितामय प्रयोग🙏

दफन होंगे

तुम्हारी मोहम्मद में शब्द ख़तम होंगे हमारी सादगी के अफताब दफन होंगे, तुम यूंही तिरछी नज़रों से निहारते रहना हमारी शख्शियत के नूर यूंही दफन होंगे।

ऐसे ही शाम होती है

तुनक मिजाजी से, तुम्हारी ज़रा तौहीन होती है मुस्कुरा कर बात करो, तो मौसिकी बेपनाह होती है, पलकें भिगो लो ज़रा, तो उस तबस्सुम में नहा लें हम तुम्हारी आशिकी में ऐसे ही सुबह और ऐसे ही शाम होती है।

नहीं बदलते

किसी के रूठने से जज़्बात नहीं बदलते चले भी जाएं अगर, तो हालात नहीं बदलते, तुम यूंही जज़्बात जाया न किया करो तुम्हारे रोने से उसके हालात नहीं बदलते। For my new friend tiलक

माँ

माँ कबीर की साखी जैसीतुलसी की चौपाई-सीमाँ मीरा की पदावली-सीमाँ है ललित रुबाई-सी। माँ वेदों की मूल चेतनामाँ गीता की वाणी-सीमाँ त्रिपिटिक के सिद्ध सूक्त-सीलोकोक्तर कल्याणी-सी। माँ द्वारे की तुलसी जैसीमाँ बरगद की छाया-सीमाँ कविता की सहज वेदनामहाकाव्य की काया-सी। माँ अषाढ़ की पहली वर्षासावन की पुरवाई-सीमाँ बसन्त की सुरभि सरीखीबगिया की अमराई-सी। माँ यमुना … Continue reading माँ