मधुशाला

मंदिर-मस्जिद बंद कराकर ,लटक रहा विद्यालय पर ताला !सरकार की मजबूरी देखो ,धन आपूर्ति करती मधुशाला !! डिस्टेंसिंग की ऐसी तैसी हुई ,लाकडाउन को धो डाला !भक्तों के व्याकुल हृदयों पररस बरसाती मधुशाला ।। बन्द रहेंगे मंदिर मस्ज़िद ,खुली रहेंगी मधुशाला।ये कैसे महामारी है ,सोच रहा ऊपरवाला ।।

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आज का लॉक डाउन में, अच्छे अच्छों की सब्ज़ी बन जाती है

कुछ यूंही कविताओं की समाधि बन जाती है, आज कल लॉक डाउन में, अच्छे अच्छों की सब्ज़ी बन जाती है। साफ सफाई और झाड़ू पोछा बर्तन में कभी, कभी सब्जी काट कर दाल चढ़ाने में जिंदगी बीत जाती है। बस यूंही लोग डाउन में अच्छे अच्छों की सब्जी बन जाती है। कहीं कोई व्हिस्की के … Continue reading आज का लॉक डाउन में, अच्छे अच्छों की सब्ज़ी बन जाती है

तुलसीदास जी के दो शिष्यों के बीच कोरोना वार्तालाप

तुलसीदास जी के दो शिष्यों के बीच कोरोना वार्तालाप पहला शिष्य :बाहर निकल भ्रमण जिन कीन्हां।खाकी-गण दारुन दु:ख दीन्हां।।लम्ब डण्ड से होत ठुकाई।करहु नियंत्रण मन पर भाई।।डाउन लॉक रहहु गृह माहीं।भ्रमण फिज़ूल करहु तुम नाहीं।। दूसरा शिष्य : सत्य सखा तव सुंदर वचनाभेदि न जाइ पुलिस की रचनाखाकीधारी अति बलशालीमारहि लाठि देहिं बहु गालीपृष्ठ भाग … Continue reading तुलसीदास जी के दो शिष्यों के बीच कोरोना वार्तालाप

छुट्टियाँ

कभी सोचा नहीं था ऐसे भी दिन आएँगेंछुट्टियाँ तो होंगी पर मना नहीं पाएँगेआइसक्रीम का मौसम होगा पर खा नहीं पाएँगेरास्ते खुले होंगे पर कहीं bhi नहीं पाएँगेजो दूर रह गए उन्हें बुला नहीं पाएँगेऔर जो पास हैं उनसे हाथ भी मिला नहीं पाएँगेजो घर लौटने की राह देखते थे वो घर में ही बंद … Continue reading छुट्टियाँ

सोचते रहोगे कब मिलें ये पल

चंद लम्हों में सिमटती जिंदगी कभी प्यार कभी तकरार में गुजरती जिंदगी, समेटे इन लम्हों को हम जी रहे प्यार भरे अल्फाजों में वो शुमार हो रहे, सुबह की ओस जैसे पड़ी फूंलों पर चमकती किरणे हुईं मुहाल उन पर। इन पलों को संजो लो अपनी यादों में मिले ना मिलें ये फुरसत के पल … Continue reading सोचते रहोगे कब मिलें ये पल

जिनपिंग चालीसा

हे जिनपिंग! चीन के स्वामी।तुम तो निकले बड़े हरामी।।1।।कोरोना के पालन कर्ता।मिल जाओ तो बना दें भरता।।2।। कोई मुल्क नहीं है बाकी।जहां ना मिलती इसकी झांकी।।3।।लॉक हुए हैं घर मे अपने।आज़ादी के देखें सपने।।4।। पत्नी कोसे बच्चा रोये।जिनपिंग नाश तुम्हारा होए।।5।।जो वुहान से भेजा कीड़ा।भोग रहा जग उसकी पीड़ा।।6।। बीमारी तुमने फैलाई।बेच रहे हो खुद … Continue reading जिनपिंग चालीसा

हरिवंश दा की प्रसिद्ध पंक्तियों की प्रेरणा

हरिवंश दा की प्रसिद्ध पंक्तियों की प्रेरणा से आज के परिपेक्ष्य में आप सभी से निवेदन,,,, शत्रु ये अदृश्य हैविनाश इसका लक्ष्य हैकर न भूल, तू जरा भी ना फिसलमत निकल, मत निकल, मत निकल हिला रखा है विश्व कोरुला रखा है विश्व कोफूंक कर बढ़ा कदम, जरा संभलमत निकल, मत निकल, मत निकल उठा … Continue reading हरिवंश दा की प्रसिद्ध पंक्तियों की प्रेरणा