नोक झोंक की वर्णमाला

मुन्ने के नंबर कम आए,पति श्रीमती पर झल्लाए,दिनभर मोबाइल लेकर तुम,टें टें टें बतियाती होआता तो है खाक तुम्हें,क्या मुन्ने को सिखलाती हो ? यह सुनकर पत्नी जी ने,सारा घर सर पर उठा लिया !पति देव को लगा कि क्यों,सोती सिंहनी को जगा दिया ! मेरे कामों का लेखा जोखा,तुमको बतलाती हूं !आओ तुमको अच्छे … Continue reading नोक झोंक की वर्णमाला

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राधे राधे

खुद को साधे नहीं , बस यूंही चलत संसार जगतपिता को ध्याय रहा, बिना भाव संसार। कैसे धरूं धीरज, निज मन को नहि आवत सुझाय फंसा आडम्बर में मांगत माया, बस यूंही चलत संसार।। ध्यान धरयो कान्हा के जब, नहीं आवत देखि हाल यूंही लीला धरे पर, कबहुं ना पूछत हाल। राधे राधे जब जपा, … Continue reading राधे राधे

आप को प्रणाम

हरामखोरों की फौज खड़ी है,सत्ता की अगवानी में।दिल्ली वाले बिक गये सारे,मुफ्त के बिजली पानी में।।शाहीनबाग ही नहीं जीता,अफजल बानी भी जीत गये।जेएनयू भी जीत गया और,रोहिंग्या भी जीत गये।वो एक हो गये अपनी ,कौम की निगहबानी में।और तुमने जमीर बेच दियाबस मुफ्त के बिजली पानी में।हिन्दुस्तान हार गया औरपाकिस्तानी जीत गयेदिल्ली वाले रीझ गये,विकास … Continue reading आप को प्रणाम

मुन्सी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता

ख्वाहिश नहीं मुझे_मशहूर होने की,_आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है._ अच्छे ने अच्छा औरबुरे ने बुरा जाना मुझे,_क्यों की जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना ही पहचाना मुझे._ जिन्दगी का फलसफा भीकितना अजीब है,_शामें कटती नहीं और_ _साल गुजरते चले जा रहें है._ एक अजीब सीदौड है ये जिन्दगी,_जीत जाओ तो कई_ … Continue reading मुन्सी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता

राहत इंदौरी को हिन्दुस्तान का जवाब

राहत इंदौरी ने लिखा था "सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी मेंकिसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है "~ अब इंदौरी और उसके चमचों को ये रहा हमारा भी जवाब: “ख़फ़ा होते हैं हो जाने दो, घर के मेहमान थोड़ी हैंजहाँ भर से लताड़े जा चुके हैं , इनका मान थोड़ी है ये … Continue reading राहत इंदौरी को हिन्दुस्तान का जवाब

हरि ओम शरण जी का भजन

दाता एक राम भिकारी सारी दुनिया दाता एक राम भिकारी सारी दुनिया राम एक देवता पुजारी सारी दुनिया पुजारी सारी दुनिया दाता एक राम..... द्वार पे उसके जाके कोई भी पुकारता परम कृपा दे अपनी भाव से उभरता ऐसे दीना नाथ पे बलिहारी सारी दुनिया दाता एक राम भिकारी सारी दुनिया दाता एक राम..... दो … Continue reading हरि ओम शरण जी का भजन

देवों की महिमा

देवों की महिमा जान सकते नहीं, प्रभु की लीला पहचान सकते नहीं, दुर्लभ कार्य भी यूंही नहीं कर जाते, खुद को भी यूंही संसार में फंसा नहीं पाते, खोजते जिसे दर बदर वह यहीं खुद में छिपा, खंगाल लो जब खुद को प्रभु खुद को भी नहीं सके छिपा।

मेरे भोले भण्डारी

मेरे भोले भण्डारी, तुम हो कैलाश के वासी, अखंड मंगल हो आता जब दरश तेरा दिख जाता, गंगा पवन धारी चन्द्रमा के भाग्य को तारी, मूषक वाहन दे कर मोर सवारी दे कर, पुत्रों के कार्य सवांरे उनके स्थान हैं धारे, मैया शक्ति ने ध्याया तप कर तुमको है पाया, महाकाल तुम विकराल हाथों त्रिशूल … Continue reading मेरे भोले भण्डारी

मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता

🐋 *मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता, जिसके एक-एक शब्द को बार-बार पढ़ने को मन करता है-_* _ख्वाहिश नहीं मुझे_ _मशहूर होने की,"_ _आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है।_ _अच्छे ने अच्छा और_ _बुरे ने बुरा जाना मुझे,_ _जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना ही पहचाना मुझे!_ _जिन्दगी का फलसफा भी_ … Continue reading मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता